Wednesday, January 14, 2026

assistant registar MPPSC 2024 Paper

          • रतौना सत्याग्रह कहाँ हुआ था?
          • रतौना (या रटौना) सत्याग्रह 
    मध्य प्रदेश के  जिले में हुआ था 

     

    इस आंदोलन से जुड़ी मुख्य जानकारी निम्नलिखित है:वर्ष: यह सत्याग्रह वर्ष 1920 में शुरू हुआ था।

          • उद्देश्य: यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार द्वारा रतौना में स्थापित किए गए एक बूचड़खाने (कसाईखाने) के विरोध में था।
          • महत्व: इसे मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र में असहयोग आंदोलन के सिद्धांतों पर आधारित पहला संगठित आंदोलन माना जाता है।
          • परिणाम: स्थानीय लोगों के कड़े विरोध और हिंदू-मुस्लिम एकता के कारण अंततः ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और इस बूचड़खाने को बंद कर दिया गया।
          • प्रमुख व्यक्तित्व: इस आंदोलन के प्रमुख नायकों में पंडित माखनलाल चतुर्वेदीभाई अब्दुल गनी और पंडित रविशंकर शुक्ल जैसे नेता शामिल थे। 
  • व्याख्या (Explanation):
            • (A) : यह सत्याग्रह 1920 ईस्वी में सागर जिले के  नामक स्थान पर हुआ था। यह मुख्य रूप से अंग्रेजों द्वारा वहाँ स्थापित किए जा रहे एक बूचड़खाने (कसाईखाना) के विरोध में था। इस आंदोलन का नेतृत्व माखनलाल चतुर्वेदी, भाई अब्दुल गनी और अन्य स्थानीय नेताओं ने किया था। अंततः जन-आक्रोश के कारण ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और बूचड़खाने को बंद कर दिया गया।
            • (B) : यहाँ 1930 में प्रसिद्ध घोड़ा डोंगरी जंगल सत्याग्रह हुआ था, जिसका नेतृत्व आदिवासी नेता गुंजन सिंह कोरकू ने किया था।
            • (C) विदिशा (Vidisha): मध्य प्रदेश में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत  से मानी जाती है
            • (D) : यहाँ 1923 में प्रसिद्ध झंडा सत्याग्रह (Flag Satyagraha) की शुरुआत हुई थी। साथ ही, मध्य प्रदेश में व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत भी  से हुई थी
          • 2. चावल आंदोलन (Rice Movement) किस जिले में हुआ था?
  • चावल आंदोलन (Rice Movement), जिसे 'रीवा चावल सत्याग्रह' के नाम से भी जाना जाता है, मध्य प्रदेश के  में हुआ था। 
    इस आंदोलन की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
            • स्थान: यह मुख्य रूप से रीवा जिले के  (Badwar) गांव में हुआ था।
            • समय: यह घटना 28 फरवरी, 1947 को घटित हुई थी।
            • कारण: तत्कालीन रीवा रियासत की सरकार द्वारा किसानों से जबरन चावल की लेवी (कर) वसूली जा रही थी, जिसका मूल्य बाजार दर से बहुत कम था।
            • शहीद: इस आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में त्रिभुवन तिवारी और भैरव प्रसाद उरमलिया शहीद हो गए थे।
            • नेतृत्व: इस आंदोलन का नेतृत्व स्थानीय किसान नेताओं और प्रजा मंडल के सदस्यों द्वारा किया गया था। 
            • इसके अलावा, सीधी जिले में भी इसी तरह का एक आंदोलन हुआ था जिसे 'चरुरहैबा आंदोलन' (Charurhaiba Movement) कहा जाता है।
            • (B) रीवा (Rewa): यह आंदोलन 28 फरवरी, 1947 को रीवा राज्य के बदवार (Badwar) गाँव में हुआ था। यहाँ के किसान राज्य द्वारा जबरन वसूले जाने वाले 'लेवी' (चावल के कर) का विरोध कर रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य के सैनिकों ने गोलियां चलाईं, जिसमें त्रिभुवन तिवारी और भैरो प्रसाद उरमलिया शहीद हो गए थे। इसे 'रीवा का चावल आंदोलन' या 'बदवार कांड' के नाम से जाना जाता है।
            • (A) सीहोर (Sehore): सीहोर जिला कुंवर चैन सिंह की शहादत के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें मध्य प्रदेश का 'मंगल पांडे' कहा जाता है। यहाँ 1824 में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुआ था।
            • (C) टीकमगढ़ (Tikamgarh): यह जिला बुंदेला शासकों की राजधानी (ओरछा) के इतिहास के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ चावल आंदोलन जैसा कोई प्रमुख ऐतिहासिक घटनाक्रम दर्ज नहीं है।
            • (D) पन्ना (Panna): पन्ना अपने हीरों की खदानों और महाराजा छत्रसाल के इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।
    3.बुंदेलों की राजधानी ‘ओरछा’ की स्थापना किसने की?


    बुंदेलों की राजधानी '' की स्थापना 16वीं शताब्दी में बुंदेला शासक रुद्र प्रताप सिंह (Rudra Pratap Singh) ने की थी। ओरछा के इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

    स्थापना वर्ष: इसकी स्थापना 1501 ईस्वी में की गई थी।
              • राजधानी का स्थानांतरण: रुद्र प्रताप सिंह के पुत्र भारती चंद ने वर्ष 1531 में बुंदेला साम्राज्य की राजधानी को गढ़कुंडार से बदलकर ओरछा कर दिया था।
              • भौगोलिक स्थिति: यह नगर मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में बेतवा नदी के तट पर स्थित है।
              • विशेषता: ओरछा अपनी वास्तुकला, महलों (जैसे जहाँगीर महल) और राम राजा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ भगवान राम को एक राजा के रूप में पूजा जाता है।
            • 4ग्वालियर के तोमर वंश का संस्थापक कौन था?
               में तोमर वंश की स्थापना 14वीं शताब्दी के अंत (लगभग 1375-1394 ई.) में वीरसिंह देव (Virasimha-deva) ने की थी। ग्वलियर के तोमर वंश से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां:

                • स्थापना: दिल्ली सल्तनत की कमजोरी का लाभ उठाकर वीरसिंह देव ने ग्वालियर पर अपना अधिकार स्थापित किया और इस स्वतंत्र राजवंश की नींव रखी।
                • सबसे शक्तिशाली शासक: राजा मानसिंह तोमर (1486–1516 ई.) इस वंश के सबसे महान और शक्तिशाली राजा थे।
                • वास्तुकला: मानसिंह तोमर ने ही ग्वालियर के किले में प्रसिद्ध 'मान मंदिर महल' और अपनी रानी मृगनयनी के लिए 'गूजरी महल' का निर्माण करवाया था।
                • सांस्कृतिक योगदान: ग्वालियर संगीत का एक प्रमुख केंद्र बना और मानसिंह तोमर ने संगीत के प्रसिद्ध ग्रंथ 'मानकौतूहल' की रचना में योगदान दिया।
                • अंत: 1517 ई. में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी ने ग्वालियर पर आक्रमण कर इसे जीत लिया, जिससे यहाँ तोमर शासन का अंत हुआ।
              • 5.एरण (Eran) से किस शासक का अभिलेख प्राप्त नहीं हुआ है?
                ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, सागर जिले के 
                 से कई महत्वपूर्ण शासकों के अभिलेख प्राप्त हुए हैं। चूँकि आपने विकल्पों का उल्लेख नहीं किया है, आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले विकल्पों के आधार पर इसका उत्तर कुमारगुप्त (Kumaragupta) या चन्द्रगुप्त प्रथम हो सकता है, क्योंकि इनके स्पष्ट अभिलेख एरण से नहीं मिले हैं। एरण से प्राप्त प्रमुख अभिलेख और उनसे संबंधित शासक निम्नलिखित हैं:

                  • समुद्रगुप्त
                    :
                     यहाँ से समुद्रगुप्त का एक शिलालेख मिला है जिसमें एरण को 'स्वभोग नगर' कहा गया है।
                  • बुधगुप्त
                    :
                     यहाँ इनका 'स्तंभ अभिलेख' (484 ई.) मिला है, जिसमें भगवान विष्णु के ध्वज स्तंभ का वर्णन है।
                  • भानुगुप्त
                    :
                     इनका 510 ई. का प्रसिद्ध अभिलेख यहाँ से प्राप्त हुआ है, जो सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य माना जाता है।
                  • तोरमाण
                    :
                     यह एक हूण शासक था, जिसका वराह मूर्ति पर अंकित अभिलेख यहाँ से मिला है।
                  • श्रीधरवर्मन
                    :
                     यह एक शक शासक था, जिसका शिलालेख भी यहाँ से प्राप्त हुआ है।
                  • 6.एरन के प्राचीन स्थल से किस शासक का शिलालेख नहींमिला है
                  • एरण से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर, सही विकल्प (C) कुमारगुप्त है
                  • , जो मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, वहाँ से विभिन्न शासकों के कई अभिलेख (inscriptions) और मुद्राएँ (coins) प्राप्त हुई हैं।
                  • इन खोजों से समुद्रगुप्ततोरमाण, और बुधगुप्त के शासनकाल के दौरान एरण के महत्व का पता चलता है, लेकिन 
                    कुमारगुप्त
                     का कोई सीधा अभिलेख या महत्वपूर्ण साक्ष्य एरण से नहीं मिला है।

                  • (A) 
                    समुद्रगुप्त
                    :
                     इनका शिलालेख (stone inscription) एरण से प्राप्त हुआ है, जिसमें इस स्थान को 'स्वभोग नगर' के रूप में संदर्भित किया गया है। [1]
                  • (B) तोरमाण: हूण शासक तोरमाण का भी एक अभिलेख एरण में मिली वराह मूर्ति पर उत्कीर्ण पाया गया है। [1]
                  • (D) बुधगुप्त: गुप्त शासक बुधगुप्त का स्तंभ अभिलेख (pillar inscription) एरण में मिला है, जिसमें भगवान विष्णु के सम्मान में एक ध्वज स्तंभ स्थापित करने का उल्लेख है। [1]
                  • भानुगुप्त नामक एक अन्य गुप्त शासक का 510 ईस्वी का प्रसिद्ध अभिलेख भी एरण से ही प्राप्त हुआ है, जो सती प्रथा का पहला लिखित साक्ष्य है।
                    7. According to NIST (National Institute
                    oसही विकल्प है (C) Pay-per-use, on demand access to shared IT resources (साझा आईटी संसाधनों तक पे-पर-यूज़, ऑन-डिमांड पहुंच)।
                    Explanation (व्याख्या)
                    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) के अनुसार, क्लाउड कंप्यूटिंग की परिभाषा एक ऐसा मॉडल है जो उपयोगकर्ता को साझा कंप्यूटिंग संसाधनों (जैसे सर्वर, स्टोरेज, एप्लिकेशन) के एक पूल तक सुविधाजनक, ऑन-डिमांड नेटवर्क पहुंच प्रदान करता है। इन संसाधनों को न्यूनतम प्रबंधन प्रयास या सेवा प्रदाता के साथ बातचीत के साथ तेजी से उपलब्ध कराया और जारी किया जा सकता है। विकल्प (C) इस परिभाषा के मुख्य बिंदुओं को सटीक रूप से पकड़ता है: पे-पर-यूज़ (उपयोग के अनुसार भुगतान), ऑन-डिमांड एक्सेस (मांग पर पहुंच), और शेयर्ड आईटी रिसोर्सेज (साझा संसाधन)।
                    Why other options are incorrect (अन्य विकल्प गलत क्यों हैं)

                     

                    (A) High-speed internet: उच्च गति का इंटरनेट क्लाउड सेवाओं तक पहुंचने के लिए आवश्यक है, लेकिन यह स्वयं क्लाउड कंप्यूटिंग की परिभाषा नहीं है।

                     

                    (B) On-site data storage: ऑन-साइट (स्थानीय परिसर में) डेटा स्टोरेज क्लाउड कंप्यूटिंग के बिल्कुल विपरीत है। क्लाउड कंप्यूटिंग में डेटा स्टोरेज प्रदाता द्वारा दूरस्थ रूप से प्रबंधित किया जाता है।

                     

                    (D) Security system for networks: सुरक्षा क्लाउड कंप्यूटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग की परिभाषा स्वयं आईटी संसाधनों के वितरण मॉडल के बारे में है, न कि केवल एक सुरक्षा प्रणाली के बारे में।

                     

                    8.ग्वालियर के तोमर वंश का संस्थापक कौन था?

                     

                    (A) वीर सिंह देव   (B) मानसिंह   C) वीरम देव     (D) डूंगर सिंह

                     

                    सही उत्तर: (A) वीर सिंह देव

                     

                    नीचे दिए गए विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:

                     

                    (A) वीर सिंह देव (संस्थापक): इन्होंने 14वीं शताब्दी के अंत में (लगभग 1394 ई.) ग्वालियर में तोमर शासन की स्थापना की। जब दिल्ली सल्तनत (तुगलक वंश) कमजोर पड़ रही थी, तब उन्होंने स्थानीय गवर्नर को हराकर ग्वालियर किले पर अधिकार कर लिया था।

                     

                    (B) मान सिंह (सबसे प्रतापी राजा): राजा मान सिंह तोमर (शासनकाल 1486–1516 ई.) इस वंश के सबसे प्रसिद्ध और यशस्वी शासक थे। उन्हें ग्वालियर के "स्वर्ण युग" का निर्माता माना जाता है। उन्होंने ही प्रसिद्ध मान मंदिर पैलेस और अपनी पत्नी मृगनयनी के लिए गूजरी महल का निर्माण कराया था। वे संगीत के महान संरक्षक थे और उन्होंने संगीत की 'ध्रुपद' शैली को बढ़ावा दिया।

                     

                    (C) वीरम देव: ये वीर सिंह देव के उत्तराधिकारी (संभवतः पुत्र) थे जिन्होंने 15वीं शताब्दी की शुरुआत (लगभग 1402–1423 ई.) में शासन किया। उनके शासनकाल में ग्वालियर में जैन विद्वानों और साहित्य को काफी प्रोत्साहन मिला।

                     

                    (D) डूंगर सिंह: डूंगर सिंह (शासनकाल 1425–1459 ई.) तोमर वंश के एक शक्तिशाली राजा थे। उनके शासनकाल के दौरान ही ग्वालियर किले की चट्टानों पर विशाल जैन प्रतिमाओं को उकेरा गया था

                     

                    9.बुंदेलों की राजधानी ‘ओरछा’ की नींव किसने रखी थी

                     

                    (A) कीरत शाह    (B) रुद्र प्रताप    (C) जुझार सिंह     (D) वीर सिंह

                     

                    सही उत्तर: (B) रुद्र प्रताप 

                     

                    बुंदेला राजवंश की राजधानी 'ओरछा' की नींव (B) रुद्र प्रताप (Rudra Pratap) ने रखी थी।

                      नीचे दिए गए सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:

                  • (B) रुद्र प्रताप सिंह (संस्थापक): राजा रुद्र प्रताप सिंह ने 1531 ईस्वी में ओरछा शहर की स्थापना की और इसे अपनी राजधानी बनाया। उन्होंने ही ओरछा के प्रसिद्ध किले का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। वे बुंदेला राज्य के पहले राजा माने जाते हैं।

                  • (D) वीर सिंह देव: राजा वीर सिंह देव (शासनकाल 1605–1627) ओरछा के सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध शासक थे। वे मुगल सम्राट जहांगीर के करीबी मित्र थे। उनके शासनकाल में ओरछा में सबसे अधिक स्थापत्य कला का विकास हुआ, जिसमें जहांगीर महल और लक्ष्मीनारायण मंदिर जैसे भव्य स्मारक बनवाए गए।

                  • (C) जुझार सिंह: जुझार सिंह, राजा वीर सिंह देव के ज्येष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे। उनके शासनकाल में मुगलों (शाहजहाँ) के साथ उनके संबंधों में कड़वाहट आ गई थी, जिसके कारण उन्होंने मुगलों के विरुद्ध विद्रोह किया था।

                  • (A) कीरत शाह: कीरत सिंह (या कीरत शाह) का संबंध मुख्य रूप से चंदेरी के बुंदेला वंश से रहा है। ओरछा की नींव रखने में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।

                  • 10.मध्य प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है?

                  • (A) गोंड (Gond)    (B) कोरकू (Korku)     (C) सैगा (Saiga)  (D) इनमें से कोई नहीं सही विकल्प (A) गोंड (Gond) है।   

                  • 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भील (Bhil) जनजाति मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी (सर्वाधिक जनसंख्या वाली) जनजाति है, जबकि गोंड जनजाति राज्य की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है। 

                  • व्याख्या    गोंड (Gond): मध्य प्रदेश में गोंड जनजाति की जनसंख्या कुल अनुसूचित जनजाति जनसंख्या का लगभग 35.6% है, जो इसे राज्य की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति बनाती है। भारत में कुल मिलाकर गोंड सबसे बड़ी जनजाति हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में वे दूसरे स्थान पर हैं।

                  • भील (Bhil): भील जनजाति मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है, जो कुल अनुसूचित जनजाति जनसंख्या का लगभग 37.7% है।

                  • अन्य विकल्प गलत क्यों हैं

                  • (B) कोरकू (Korku): कोरकू मध्य प्रदेश की चौथी सबसे अधिक आबादी वाली जनजाति है (कोल जनजाति के बाद)।

                  • (C) सैगा (Saiga): यह संभवतः बैगा (Baiga) जनजाति की गलत वर्तनी है, जो राज्य की छठी सबसे अधिक आबादी वाली जनजाति है (कोल और कोरकू के बाद)।

                  • (D) इनमें से कोई नहीं: सही उत्तर, गोंड, विकल्पों में सूचीबद्ध है, इसलिए यह विकल्प गलत है।

                  • 11. विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कौन-सी योजना है?

                  • (A) अन्न योजना (Food Grain Scheme)

                  • (B) आहार अनुदान योजना (Aahaar Anudaan Yojana)  C) कर्मवीर योजना (Karmveer Yojana)

                  • (D) इनमें से कोई नहीं

                  • सही उत्तर विकल्प (B) आहार अनुदान योजना (Aahaar Anudaan Yojana) है।

                  • इस योजना की विस्तृत व्याख्या और अन्य विकल्पों की जानकारी नीचे दी गई है:

                  • (B) आहार अनुदान योजना: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यह योजना विशेष रूप से तीन अत्यंत पिछड़ी जनजातियों—बैगा (Baiga), भारिया (Bharia) और सहारिया (Saharia) के लिए चलाई जा रही है।

                  • उद्देश्य: इन जनजातियों के परिवारों को कुपोषण से मुक्ति दिलाना।

                  • लाभ: इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह 1500 रुपये (2026 के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार) की राशि सीधे हस्तांतरित (DBT) की जाती है, ताकि वे पौष्टिक भोजन खरीद सकें।

                  • \(A) अन्न योजना: यह सामान्यतः सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से संबंधित है, जिसके तहत पात्र परिवारों को रियायती दरों पर राशन (गेहूं, चावल आदि) मिलता है। यह विशेष रूप से केवल पिछड़ी जनजातियों के कुपोषण के लिए लक्षित "अनुदान" योजना नहीं है।

                  • (C) कर्मवीर योजना: मध्य प्रदेश में 'कर्मवीर' शब्द का प्रयोग अक्सर पुलिसकर्मियों या कोरोना काल में उत्कृष्ट सेवा देने वालों के सम्मान (जैसे कर्मवीर पदक) के लिए किया जाता रहा है। जनजातीय कुपोषण निवारण से इस नाम की कोई प्रमुख योजना सीधे संबंधित नहीं है।

                  • निष्कर्ष:

                  • विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रमुख योजना आहार अनुदान योजना ही है। इस योजना के बारे में अधिक आधिकारिक जानकारी के लिए आप मध्य प्रदेश जनजातीय कार्य विभाग की वेबसाइट देख सकते हैं।

                  • 12बैगा (Baiga) जनजाति का कुलदेव कौन है?

                  • (A) गौरा देव (Gaura Dev) (B) बुधा देव (Budha Dev)  (C) भैरव देव (Bhairav Dev)  (D) इनमें से कोई नहींसही उत्तर विकल्प (B) बुढ़ा देव (Budha Dev) है। [1]

                  • व्याख्या:(B) बुढ़ा देव: बैगा जनजाति के सबसे प्रमुख और पूजनीय देवता 'बुढ़ा देव' हैं। [2] बैगाओं की मान्यता है कि बुढ़ा देव साज (Saaj) के वृक्ष में निवास करते हैं। [1] इसीलिए बैगा जनजाति के लोग साज के पेड़ की पूजा करते हैं और इसकी पत्तियों को हाथ में लेकर कभी झूठ नहीं बोलते। [2]\

                  • (A) गौरा देव: यह मुख्य रूप से गोंड और कुछ अन्य जनजातियों में शिव-पार्वती की पूजा (गौरा-गौरी) से संबंधित है, लेकिन यह बैगाओं के मुख्य कुलदेवता नहीं हैं। [2]

                  • (C) भैरव देव: भैरव देव की पूजा कई समुदायों में की जाती है, परंतु बैगा जनजाति के प्राथमिक आराध्य देव बुढ़ा देव और दूल्हा देव (जो बीमारियों से रक्षा करते हैं) माने जाते हैं। [1]

                  • अतः, बैगा जनजाति के मुख्य कुलदेवता बुढ़ा देव ही हैं।

                  • 13.रानी दुर्गावती किस जनजाति से संबंधित थीं?

                          • (A) गोंड (Gond) ✅
                            (B) कोल (Kol)
                            (C) भील (Bheel)
                            (D) भारिया (Bharia)

                          • सही उत्तर: (A) गोंड (Gond)
                            व्याख्या:
                            रानी दुर्गावती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र की गोंड जनजाति की राजकुमारी थीं।
                            उन्होंने मालीगांव और मालवा क्षेत्रों में गोंड राज्य का शासन किया।
                            1530–1564 ई. के बीच उनका शासनकाल रहा।
                            वे मुगलों के खिलाफ वीरगाथा के लिए प्रसिद्ध हैं।                                             उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकल्पों की व्याख्या नीचे दी गई है:
                                • (A) गोंड (Gond): रानी दुर्गावती गोंडवाना साम्राज्य की प्रसिद्ध शासिका थीं। हालांकि उनका जन्म महोबा के चंदेल राजपूत राजा कीरत राय के यहाँ हुआ था, लेकिन उनका विवाह गोंड राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने पुत्र वीर नारायण की संरक्षिका के रूप में गोंडवाना (गढ़-मंडला) पर शासन किया और मुगल सम्राट अकबर की सेना से डटकर मुकाबला किया।
                                • (B) कोल (Kol): यह मध्य प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है, जो मुख्य रूप से रीवा, सीधी और सतना जिलों में पाई जाती है। इनका रानी दुर्गावती के राजवंश से सीधा संबंध नहीं था।
                                • (C) भील (Bheel): यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है, जो मुख्य रूप से झाबुआ, धार और खरगोन जैसे पश्चिमी जिलों में निवास करती है।
                                • (D) भारिया (Bharia): यह एक विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति है, जो मुख्य रूप से छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट में पाई जाती है।
                              निष्कर्ष: रानी दुर्गावती गोंडवाना की रानी थीं और उन्होंने गोंड शासक के रूप में ही इतिहास में ख्याति प्राप्त की, इसलिए उन्हें गोंड जनजाति के गौरव का प्रतीक माना जाता है। उनके सम्मान में जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रखा गया है।
                              14.प्रधान गायक (Pardhan Singer) किस जनजाति से संबंधित है?
                              (A) बैगा (Baiga)
                              (B) भील (Bheel)
                              (C) गोंड (Gond) ✅
                              (D) भारिया (Bharia)
                              सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है:
                                • (C) गोंड (Gond): परधान, गोंड जनजाति की ही एक उप-जाति है। इनका मुख्य कार्य गोंड राजाओं की वंशावली और उनकी वीरता की कहानियों को गाकर सुनाना होता है। ये 'बाना' नामक वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं और गोंडों के पुजारी व 'गाथा गायक' के रूप में जाने जाते हैं।
                                • (A) बैगा (Baiga): बैगा जनजाति के अपने विशिष्ट लोकगीत और नृत्य होते हैं (जैसे कर्मा, परधोनी), लेकिन 'परधान' गायक वर्ग विशेष रूप से गोंडों से जुड़ा है।
                                • (B) भील (Bheel): भील जनजाति के लोक संगीत में 'गायन' की अपनी परंपराएँ हैं, लेकिन इनका परधानों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
                                • (D) भारिया (Bharia): यह एक अत्यंत पिछड़ी जनजाति है, जो पातालकोट (छिंदवाड़ा) के लिए जानी जाती है। इनका भी परधान गायन परंपरा से संबंध नहीं है।
                              निष्कर्ष: मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत में परधानों को गोंडों के 'पुरोहित और कथावाचक' के रूप में पहचाना जाता है।
                              (A) बैगा (Baiga) जनजाति के मुख्य गायन
                              बैगा जनजाति प्रकृति प्रेमी होती है और उनके गीतों में जीवन के विभिन्न रंगों का वर्णन मिलता है:
                                • ददरिया (Dadariya): यह बैगाओं का सबसे प्रसिद्ध लोकगीत है, जिसे 'प्रेम गीत' भी कहा जाता है। इसे अक्सर खेती के दौरान या जंगलों में गाया जाता है।
                                • फाग (Phag): होली के अवसर पर गाए जाने वाले गीत।
                                • कर्मा गीत: कर्मा नृत्य के साथ गाए जाने वाले गीत, जो कर्म और भाग्य पर आधारित होते हैं।
                                • परधोनी: विवाह के अवसर पर बारात के स्वागत के समय गाए जाने वाले गीत।
                              (B) भील (Bheel) जनजाति के मुख्य गायन
                              भील जनजाति के गायन में वीरता और उत्सव का मिश्रण होता है:
                                • भगोरिया गीत: भगोरिया हाट (मेले) के दौरान गाए जाने वाले उमंग भरे गीत।
                                • हालो (Halo): यह भीलों का एक पारंपरिक लोकगीत है।
                                • कोली/गरबा: भील महिलाएं गुजरात से सटे क्षेत्रों में गरबा और उससे मिलते-जुलते लोकगीत गाती हैं।
                                • पिथोरा गायन: पिथोरा भित्ति चित्र बनाते समय भी विशेष अनुष्ठानिक गीत गाए जाते हैं।
                              (D) भारिया (Bharia) जनजाति के मुख्य गायन
                              भारिया जनजाति (मुख्यतः पातालकोट निवासी) के गायन उनके विशिष्ट वाद्ययंत्रों और नृत्यों से जुड़े होते हैं:
                                • भड़म (Bhadam): यह इनका सबसे प्रमुख गायन और नृत्य है, जो विवाह के अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है।
                                • सैतम (Saitam): महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीत।
                                • कर्मा और शैला: गोंडों की तरह भारिया भी कर्मा गीत गाते हैं, लेकिन उनकी शैली और लय स्थानीय होती है।
                              निष्कर्ष: जहाँ प्रधान गोंडों की वीरगाथाएँ गाते हैं, वहीं बैगा अपने 'ददरिया' के लिए, भील अपने 'भगोरिया' के लिए और भारिया अपने 'भड़म' गायन के लिए प्रसिद्ध हैं।
                              15.कटनी से प्राप्त ‘रूपनाथ अभिलेख’ किस शासक का है?
                              (A) पुष्यमित्र शुंग (Pushyamitra Shunga)
                              (B) कुमारगुप्त (Kumar Gupta)
                              (C) अशोक (Ashoka)
                              (D) वशिष्ठ (Vashishka)
                              कटनी जिले से प्राप्त 'रूपनाथ शिलालेख' सम्राट (C) अशोक से संबंधित है।
                              सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है:
                                • (C) अशोक (Ashoka): रूपनाथ शिलालेख मौर्य सम्राट अशोक के लघु शिलालेखों (Minor Rock Edicts) में से एक है। यह मध्य प्रदेश के कटनी जिले (तत्कालीन जबलपुर) में स्थित है। इस शिलालेख में अशोक ने अपने धम्म (Dharma) के संदेशों और बौद्ध धर्म के प्रसार के प्रयासों का वर्णन किया है। यह लगभग 232 ईसा पूर्व का है।
                                • (A) पुष्यमित्र शुंग (Pushyamitra Shunga): वह शुंग वंश के संस्थापक थे। उनका साम्राज्य मध्य प्रदेश के साँची और भरहुत स्तूपों के जीर्णोद्धार के लिए जाना जाता है, लेकिन रूपनाथ शिलालेख उनसे संबंधित नहीं है।
                                • (B) कुमार गुप्त (Kumar Gupta): वह गुप्त वंश के एक प्रमुख शासक थे। उनके काल के प्रसिद्ध शिलालेख मध्य प्रदेश में मंदसौर (रेशम बुनकरों की श्रेणी का शिलालेख) आदि स्थानों से मिले हैं, लेकिन रूपनाथ शिलालेख उनका नहीं है।
                                • (D) वशिष्क (Vashishka): वह कुषाण वंश के शासक थे। कुषाणों का प्रभाव मध्य प्रदेश के कुछ उत्तरी क्षेत्रों में था, लेकिन रूपनाथ के इस विशिष्ट मौर्यकालीन शिलालेख से उनका कोई संबंध नहीं है।

                              निष्कर्ष: रूपनाथ का ऐतिहासिक महत्व अशोक के शासनकाल और बौद्ध धर्म के प्रसार को दर्शाता है। सही उत्तर विकल्प (C) है।
                              16.किस वंश के शासनकाल में ग्रीक राजदूत हेलीओडोरस (Heliodorus) बेषनगर आए थे?
                              (A) कण्व वंश (Kanva)
                              (B) शुंग वंश (Shunga) ✅
                              (C) शक वंश (Shaka)
                              (D) कुषाण वंश (Kushans)
                              ग्रीक राजदूत हेलियोडोरस (B) शुंग राजवंश के शासनकाल के दौरान बेस नगर (विदिशा) आया था
                              सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है:
                                • (B) शुंग (Shunga): हेलियोडोरस शुंग वंश के राजा भागभद्र (Bhagabhadra) के दरबार में आया था, जो उस समय विदिशा में शासन कर रहे थे। हेलियोडोरस ने यहाँ प्रसिद्ध गरुड़ स्तंभ की स्थापना करवाई, जिसे स्थानीय रूप से 'खाम बाबा' कहा जाता है। यह स्तंभ भगवान विष्णु को समर्पित है, जो यह दर्शाता है कि हेलियोडोरस ने भागवत धर्म अपना लिया था।
                                • (A) कण्व (Kanva): कण्व वंश ने शुंग वंश के बाद शासन किया था। अंतिम शुंग शासक देवभूति की हत्या वासुदेव कण्व ने की थी। हेलियोडोरस का आगमन कण्व काल से पहले हुआ था।
                                • (C) शक (Shaka): शक मध्य एशिया से आए आक्रमणकारी थे जिन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिमी भारत और मालवा में शासन किया। शुंग काल के बाद के समय में शकों का प्रभाव बढ़ा था।
                                • (D) कुषाण (Kushans): कुषाण वंश का शासन मुख्य रूप से उत्तर भारत और मध्य एशिया में केंद्रित था। कनिष्क इस वंश के प्रमुख शासक थे। उनका काल भी हेलियोडोरस के आगमन के बाद का है।
                              निष्कर्ष: हेलियोडोरस की यात्रा और गरुड़ स्तंभ की स्थापना स्पष्ट रूप से शुंग काल की घटनाएँ हैं, जो इस क्षेत्र में भारतीय-यूनानी संबंधों और धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाती हैं। अतः, सही उत्तर विकल्प (B) है।
                              17.चंदेला साम्राज्य पर महमूद गजनी के आक्रमण के समय चंदेला शासक कौन था?
                              (A) यशोवर्मन (Yashovarman)
                              (B) ढंगदेव (Dhangdeva)
                              (C) कीर्तिवर्मन (Kirtivarman)
                              (D) विद्याधर (Vidhyadhara) ✅
                              जब महमूद गजनवी ने चंदेल साम्राज्य पर आक्रमण किया (लगभग 1019-1022 ईस्वी), तब वहाँ के शासक (D) विद्याधर (Vidhyadhara) थे।
                              यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                • (D) विद्याधर (Vidhyadhara): ये चंदेल वंश के सबसे शक्तिशाली और प्रतापी शासक माने जाते हैं। जब महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया, तो विद्याधर ही एकमात्र ऐसे भारतीय शासक थे जिन्होंने उसका सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। उन्होंने गजनवी के खिलाफ राजाओं का एक संघ भी बनाया था। खजुराहो का प्रसिद्ध कंदरिया महादेव मंदिर इन्हीं के शासनकाल में बना था।
                                • (A) यशोवर्मन (Yashovarman): ये चंदेल वंश के शुरुआती महान शासकों में से एक थे (शासनकाल लगभग 925–950 ईस्वी)। उन्होंने खजुराहो में लक्ष्मण मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था। इनका शासनकाल गजनवी के आक्रमणों से बहुत पहले का है।
                                • (B) धंगदेव (Dhangdeva): यशोवर्मन के पुत्र धंगदेव (शासनकाल लगभग 950–1002 ईस्वी) ने चंदेलों को पूरी तरह स्वतंत्र बनाया। उन्होंने खजुराहो के विश्वनाथ और पार्श्वनाथ मंदिर बनवाए। हालाँकि उन्होंने सुबुक्तगीन (गजनवी के पिता) के खिलाफ हिंदू संघ का साथ दिया था, लेकिन महमूद गजनवी के मुख्य आक्रमणों के समय वे शासक नहीं थे।
                                • (C) कीर्तिवर्मन (Kirtivarman): ये 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (लगभग 1060–1100 ईस्वी) के शासक थे। इन्होंने चंदेलों की शक्ति को पुनर्जीवित किया और 'महोबा' को अपनी राजधानी के रूप में विकसित किया। इनका समय गजनवी के आक्रमण के काफी बाद का है।
                              • 18.भोज द्वारा रचित वास्तुकला पर पुस्तक कौन-सी है?
                                (A) कूर्म शतक (Koorma Shatak)
                                (B) तत्व प्रकाश (Tatva Prakash)
                                (C) भोज चम्पू (Bhoj Champu)
                                (D) सामरंगण सूत्रधार (Samrangana Sutradhar) ✅
                                राजा भोज द्वारा वास्तुकला (Architecture) पर लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तक (D) समरांगण सूत्रधार (Samarangana Sutradhar) है।
                                यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                  • (D) समरांगण सूत्रधार (Samarangana Sutradhar): यह राजा भोज द्वारा रचित वास्तुकला और शिल्पशास्त्र का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें नगर नियोजन, भवन निर्माण, मंदिर वास्तुकला और यहाँ तक कि 'यंत्रों' (जैसे उड़ने वाले यंत्र या मशीनें) के निर्माण का भी वर्णन मिलता है।
                                • राजा भोज (11वीं सदी) ने वास्तुकला और निर्माण के लिए कई ग्रंथ लिखवाए।
                                  ‘सामरंगण सूत्रधार’ वास्तुकला, किले, मंदिर और भवन निर्माण की संपूर्ण जानकारी देने वाला ग्रंथ है।

                                  • (A) कूर्म शतक (Koorma Shatak):संस्कृत कविता पर ग्रंथ- यह राजा भोज द्वारा रचित एक काव्य ग्रंथ है। यह प्राकृत भाषा में लिखा गया है और इसे धार की भोजशाला में पत्थरों पर उत्कीर्ण पाया गया है। यह वास्तुकला पर नहीं बल्कि काव्य श्रेणी में आता है।
                                  • (B) तत्व प्रकाश (Tatva Prakash): दर्शन और तत्त्वज्ञान पर ग्रंथ-यह राजा भोज द्वारा शैव दर्शन (Saiva Philosophy) पर लिखा गया एक ग्रंथ है। इसमें धर्म और दर्शन की व्याख्या की गई है।
                                  • (C) भोज चम्पू (Bhoj Champu): साहित्यिक काव्य ग्रंथ-यह राजा भोज की एक साहित्यिक कृति है जो 'चम्पू' शैली (गद्य और पद्य का मिश्रण) में लिखी गई है। यह मुख्य रूप से रामायण की कथा पर आधारित है।
                                निष्कर्ष: वास्तुकला और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में राजा भोज का सबसे महान योगदान समरांगण सूत्रधार है। अतः सही उत्तर विकल्प (D) है। 2026 में भी यह ग्रंथ भारतीय वास्तुशास्त्र के अध्ययन के लिए एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
                                19.गांधी सागर बाँध किस नदी पर बनाया गया है?
                                (A) सोन (Son)
                                (B) बेतवा (Betwa)
                                (C) चंबल (Chambal) ✅
                                (D) केन (Ken)
                                गांधी सागर बांध (C) चंबल नदी पर निर्मित है।
                                यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                  • (C) चंबल (Chambal): गांधी सागर बांध चंबल नदी पर बनने वाली पहली महत्वपूर्ण जलविद्युत और सिंचाई परियोजना है। यह मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित है। इसका शिलान्यास 1954 में हुआ था। चंबल नदी पर इसके अलावा राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज भी बने हुए हैं। [2026 में भी यह मध्य प्रदेश की बिजली आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है।]
                                  • (A) सोन (Son): सोन नदी पर मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बाणसागर बांध (Bansagar Dam) बना हुआ है। गांधी सागर बांध का इस नदी से संबंध नहीं है।
                                  • (B) Betwa (बेतवा): बेतवा नदी पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर माताटीला बांध और राजघाट बांध (रानी लक्ष्मीबाई परियोजना) निर्मित हैं।
                                  • (D) केन (Ken): केन नदी पर 'गंगऊ' परियोजना स्थित है। वर्तमान में (2026 तक) केन-बेतवा लिंक परियोजना चर्चा में है, लेकिन गांधी सागर बांध इस नदी पर नहीं है।
                                • 20.कोलार प्रोजेक्ट (Kolar Project) किस जिले में स्थित है?
                                  (A) भोपाल (Bhopal)
                                  (B) सतना (Satna)
                                  (C) रीवा (Rewa)
                                  (D) सीहोर (Sehore) ✅
                                  कोलर परियोजना (Kolar Project) मध्य प्रदेश के (D) सीहोर (Sehore) जिले में स्थित है।
                                  यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                    • (D) सीहोर (Sehore): कोलर परियोजना सीहोर जिले की नसरुल्लागंज तहसील के पास कोलर नदी (जो नर्मदा की एक सहायक नदी है) पर स्थित है। यह बांध न केवल सीहोर जिले में सिंचाई के काम आता है, बल्कि भोपाल शहर को पीने के पानी की आपूर्ति करने वाला मुख्य स्रोत भी है। [2026 में भी यह भोपाल की जल आपूर्ति प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।]
                                    • (A) भोपाल (Bhopal): हालांकि कोलर बांध का पानी मुख्य रूप से भोपाल शहर की प्यास बुझाता है, लेकिन भौगोलिक रूप से यह बांध और इसका जलाशय सीहोर जिले की सीमा में आता है। भोपाल में अपनी बड़ी झील (Upper Lake) है, जिसे भोजताल कहा जाता है।
                                    • (B) सतना (Satna): सतना जिला मुख्य रूप से अपनी सीमेंट फैक्ट्रियों और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की प्रमुख सिंचाई परियोजना बाणसागर परियोजना (सोन नदी) से लाभान्वित होती है।
                                    • (C) रीवा (Rewa): रीवा जिले में बिछिया नदी बहती है। यहाँ की प्रमुख सिंचाई नहरें भी बाणसागर बांध से जुड़ी हुई हैं। रीवा अपने जलप्रपातों (जैसे चचाई जलप्रपात) के लिए जाना जाता है, न कि कोलर परियोजना के लिए।

                                  निष्कर्ष: कोलर परियोजना का स्थान सीहोर जिला है। अतः सही उत्तर विकल्प (D) है। अधिक विवरण के लिए आप मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
                                  21.खनिज श्रृंखला (Mineral Series) का विस्तार पन्ना-छतरपुर जिलों में किस क्षेत्र में हुआ है?
                                  (A) रायलो (Raylo)
                                  (B) अजाबगढ़ (Ajabgad)
                                  (C) बीजावर (Bijawar) ✅
                                  (D) रायचूर (Raichur)
                                  पन्ना और छतरपुर जिलों में विस्तृत खनिज श्रृंखला (Mineral series) का नाम (C) बिजावर (Bijawar) श्रृंखला है।
                                  यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                    • (C) बिजावर (Bijawar): यह श्रृंखला मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में पाई जाती है। ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पन्ना की प्रसिद्ध हीरे की खदानें इसी बिजावर श्रृंखला की चट्टानों (किम्बरलाइट पाइप) में स्थित हैं। यह कड़प्पा (Cuddapah) शैल समूह का हिस्सा है। [2026 में भी पन्ना भारत का प्रमुख हीरा उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।]
                                    • (A) रायलो (Raylo): रायलो श्रृंखला मुख्य रूप से राजस्थान के दिल्ली सुपरग्रुप का हिस्सा है। यह अपने उत्तम दर्जे के संगमरमर (जैसे मकराना का पत्थर) के लिए प्रसिद्ध है। इसका विस्तार मध्य प्रदेश के पन्ना-छतरपुर क्षेत्र में नहीं है।
                                    • (B) अजबगढ़ (Ajabgad): यह भी दिल्ली सुपरग्रुप की एक श्रृंखला है, जो मुख्य रूप से राजस्थान और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। इसमें मुख्य रूप से स्लेट, क्वार्टजाइट और चूना पत्थर पाया जाता है।
                                    • (D) रायचूर (Raichur): रायचूर मुख्य रूप से कर्नाटक का एक क्षेत्र (Doab) है, जो अपनी स्वर्ण खदानों (हट्टी गोल्ड माइन्स) और भूगर्भीय संरचनाओं के लिए जाना जाता है। इसका मध्य प्रदेश की खनिज श्रृंखलाओं से कोई संबंध नहीं है।
                                  निष्कर्ष: पन्ना और छतरपुर में हीरों के भंडार वाली श्रृंखला बिजावर है। अतः सही उत्तर विकल्प (C) है। खनिज संसाधनों की अधिक जानकारी के लिए आप MP Mineral Resources Department की वेबसाइट देख सकते हैं।
                                  22.सतना जिले के बेहट खदान (Behat Mines) किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
                                  (A) मैंगनीज (Manganese)
                                  (B) ओक्रे (Ochre) 
                                  (C) काउलिन (Kaolin)✅
                                  (D) संगमरमर (Marble)
                                  सतना जिले की 
                                  बेहट (Behat)
                                   खदानें मुख्य रूप से (C) चाइना क्ले (Kaolin) के लिए प्रसिद्ध हैं।
                                  सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या नीचे दी गई है:
                                    • (C) चाइना क्ले (Kaolin): सतना जिले के बेहट और 
                                      पथरहटा
                                       जैसे क्षेत्र चाइना क्ले (या केओलिन/सफेद मिट्टी) के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इस मिट्टी का उपयोग मुख्य रूप से चीनी मिट्टी के बर्तन, सिरेमिक उद्योग और कुछ हद तक कागज उद्योग में किया जाता है।
                                    • (A) मैंगनीज (Manganese): मैंगनीज के लिए मध्य प्रदेश में  जिले की  खदानें विश्व प्रसिद्ध हैं। सतना में मैंगनीज का उत्पादन नहीं होता है।
                                    • (B) गेरू (Ochre): गेरू (लाल या पीला रंगद्रव्य) के भंडार मध्य प्रदेश में कई जगहों पर हैं, खासकर  और  जिलों में। हालांकि बेहट मुख्य रूप से क्ले के लिए जाना जाता है, गेरू भी इस क्षेत्र में पाया जाता है।
                                    • (D) संगमरमर (Marble): संगमरमर मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के  जिले के  और  में पाया जाता है। सतना में इसका वाणिज्यिक उत्पादन नहीं होता। 
                                  निष्कर्ष: सतना जिले में, बेहट खदानों की विशिष्ट पहचान चाइना क्ले (Kaolin) के उत्पादन के कारण है। अतः सही उत्तर विकल्प (C) है।
                                  23.वेलस्पैन-सोलर प्रोजेक्ट (Welspan-Solar Project) किस जिले में स्थित है?
                                  (A) देवास (Dewas)
                                  (B) उज्जैन (Ujjain)
                                  (C) नीमच (Neemach) ✅
                                  (D) मंदसौर (Mandsaur)
                                  वेलस्पन सोलर प्रोजेक्ट (Welspun Solar Project) मध्य प्रदेश के (C) नीमच (Neemuch) जिले में स्थित है।
                                  यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                    • (C) नीमच (Neemuch): वेलस्पन एनर्जी द्वारा विकसित 151 मेगावाट का विशाल सोलर पावर प्लांट नीमच जिले की जावद तहसील (भगवानपुरा गांव) में स्थित है। इसका उद्घाटन 2014 में हुआ था और उस समय यह एशिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक था। 2026 में भी यह मध्य प्रदेश के नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।
                                    • (D) मंदसौर (Mandsaur): नीमच के पड़ोसी जिले मंदसौर में भी एक विशाल सौर ऊर्जा पार्क (250 मेगावाट) स्थित है। हालांकि, 'वेलस्पन' नाम का विशिष्ट प्रोजेक्ट नीमच में है, जबकि मंदसौर एनटीपीसी (NTPC) और अन्य कंपनियों के प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है।
                                    • (A) देवास (Dewas): देवास जिला मुख्य रूप से अपनी पवन ऊर्जा (Wind Energy) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ जामगोदरानी और अन्य पहाड़ियों पर सैकड़ों पवन चक्कियाँ (Windmills) लगी हुई हैं।
                                    • (B) उज्जैन (Ujjain): उज्जैन जिला कृषि और धार्मिक पर्यटन (महाकाल मंदिर) के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सौर ऊर्जा के कुछ छोटे प्रोजेक्ट्स और व्यक्तिगत प्लांट तो हैं, लेकिन वेलस्पन जैसा कोई बड़ा राष्ट्रीय स्तर का सोलर पार्क नहीं है
                                    • निष्कर्ष: वेलस्पन सोलर प्रोजेक्ट का सही स्थान नीमच है। अतः सही उत्तर विकल्प (C) है। मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की अधिक जानकारी के लिए आप MP New and Renewable Energy Department की वेबसाइट देख सकते हैं।
                                  • 24.चंबल नदी पर स्थित जलप्रपात (Waterfall) कौन-सा है?
                                    (A) राहतगढ़
                                    (B) केवटी
                                    (C) अप्सरा
                                    (D) मंधार
                                    सही उत्तर: (D) मंधार
                                    व्याख्या:
                                    मंधार जलप्रपात चंबल नदी पर स्थित है (मुरैना क्षेत्र)।
                                    अन्य विकल्प:
                                    राहतगढ़ जलप्रपात → बेतवा नदी (सागर)
                                    केवटी जलप्रपात → केन नदी (पन्ना)
                                    अप्सरा जलप्रपात → नर्मदा नदी
                                    दिए गए विकल्पों के अनुसार, चंबल नदी पर स्थित जलप्रपात के बारे में जानकारी नीचे दी गई है। हालांकि, ध्यान दें कि चंबल का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात 'चुलिया' (Chulia) है, लेकिन यहाँ विकल्पों के आधार पर व्याख्या इस प्रकार है:
                                          • (D) मान्धार (Mandhar): ऐतिहासिक और भौगोलिक संदर्भों में, मान्धार जलप्रपात नर्मदा नदी पर स्थित है (ओंकारेश्वर के पास), लेकिन कुछ स्थानीय संदर्भों और पुराने भौगोलिक वर्गीकरण में इसे चंबल के जल निकासी तंत्र या समीपवर्ती क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है। परन्तु आधिकारिक रूप से चंबल का मुख्य प्रपात चुलिया ही है।
                                        यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                          • (A) राहतगढ़ (Rahatgarh): यह जलप्रपात मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीना नदी पर स्थित है। इसे 'भालकुण्ड' जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। यह चंबल नदी पर नहीं है।
                                          • (B) केवटी (Kevati): यह जलप्रपात मध्य प्रदेश के रीवा जिले में महाना नदी (टोंस की सहायक नदी) पर स्थित है। यह भारत के ऊँचे जलप्रपातों में से एक है।
                                          • (C) अप्सरा (Apsara): यह जलप्रपात पचमढ़ी (नर्मदापुरम/होशंगाबाद) में स्थित है। यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है, लेकिन इसका चंबल नदी से कोई संबंध नहीं है।
                                          • (D) मान्धार (Mandhar): जैसा कि बताया गया है, मान्धार मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर (खंडवा जिले में) स्थित है।
                                        विशेष नोट: यदि प्रश्न का उद्देश्य चंबल नदी के प्रमुख जलप्रपात को जानना है, तो वह चुलिया (Chulia) जलप्रपात है जो राजस्थान के भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के पास चंबल नदी पर स्थित है। यदि परीक्षा के विकल्पों में विसंगति है, तो निकटतम उत्तर या 'इनमें से कोई नहीं' का विकल्प देखना चाहिए।
                                        निष्कर्ष: विकल्पों के अनुसार कोई भी सीधे तौर पर केवल चंबल का जलप्रपात नहीं है, लेकिन राहतगढ़ बीना (चंबल के व्यापक बेसिन का हिस्सा) पर है, जबकि मान्धार नर्मदा पर है। आधिकारिक डेटा के लिए MP Tourism Waterfalls देख सकते हैं।
                                        25गोमनपुर पहाड़ी (Gomanpur Hill) किस जिले में स्थित है?
                                        (A) खंडवा
                                        (B) खरगोन
                                        (C) धार ✅
                                        (D) देवास

                                      • सही उत्तर: (C) धार
                                        व्याख्या:
                                        गोमनपुर पहाड़ी मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है।
                                        यह क्षेत्र मालवा–विंध्याचल भू-भाग से संबंधित है।
                                        गोमानपुर पहाड़ी (Gomanpur Hill)
                                         मध्य प्रदेश के 
                                        (C) धार (Dhar) जिले में स्थित है। 
                                        व्याख्या (Explanation):
                                  • (C) धार (Dhar): गोमानपुर चोटी विंध्याचल पर्वत श्रृंखला का पश्चिमी हिस्सा है। यह धार जिले की सरदारपुर तहसील में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 556.26 मीटर (कुछ स्रोतों के अनुसार 554 मीटर) है। यह पहाड़ी क्षेत्र सरदारपुर तहसील और झाबुआ जिले के बीच की सीमा का निर्धारण करता है और यहीं से विंध्याचल श्रेणी का एक घुमावदार भाग शुरू होता है जो नर्मदा घाटी के समानांतर चलता है।
                                  • (A) खंडवा (Khandwa): यह जिला सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के अंतर्गत आता है। यहाँ प्रसिद्ध असीरगढ़ की पहाड़ियां स्थित हैं, लेकिन गोमानपुर यहाँ नहीं है।
                                  • (B) खरगोन (Khargone): यह जिला भी मुख्य रूप से सतपुड़ा और नर्मदा घाटी के क्षेत्र में आता है। यहाँ बीजागढ़ की पहाड़ियां प्रसिद्ध हैं।
                                  • (D) देवास (Dewas): देवास मालवा के पठार पर स्थित है और अपनी टेकरी (माता की टेकरी) के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन गोमानपुर पहाड़ी यहाँ स्थित नहीं है। 
                                अतः, सही उत्तर विकल्प (C) है। 2026 के वर्तमान भौगोलिक आंकड़ों के अनुसार भी यह धार जिले की एक महत्वपूर्ण भौगोलिक पहचान बनी हुई है
                                26.मैकलसुता (Maikalsuta)’ किस नदी का नाम है?
                                (A) धसान
                                (B) टोंस
                                (C) सिंधु
                                (D) नर्मदा

                              • सही उत्तर: (D) नर्मदा
                                व्याख्या:
                                नर्मदा नदी का उद्गम मैकल पर्वत श्रृंखला (अमरकंटक) से होता है।
                                इसलिए नर्मदा को “मैकलसुता” भी कहा जाता है।
                                अन्य नदियाँ मैकल पर्वत से नहीं निकलतीं।
                                मैकलसुता' (Maikalsuta) (D) नर्मदा (Narmada) नदी का एक अन्य प्रसिद्ध नाम है।
                                यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                    • (D) नर्मदा (Narmada): नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक से होता है, जो मैकल पर्वत श्रेणी (Maikal Range) का हिस्सा है। मैकल पर्वत से निकलने के कारण ही इसे 'मैकलसुता' (अर्थात् मैकल की पुत्री) कहा जाता है। इसके अन्य नामों में रेवा, शिवपुत्री और नामोदोस (टॉलेमी द्वारा दिया गया नाम) शामिल हैं। यह मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कहलाती है। [2026 में भी यह राज्य की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है।]
                                    • (A) धसान (Dhasan): यह बेतवा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह रायसेन जिले से निकलती है और उत्तर प्रदेश की ओर बहती है। इसे मैकलसुता नहीं कहा जाता।
                                    • (B) टोंस (Tons): इसे 'तमसा' (Tamsa) के नाम से भी जाना जाता है। यह सतना जिले के मैहर के पास से निकलती है और अंत में गंगा नदी में मिल जाती है।
                                    • (C) सिंधु (Sindhu/Sindh): मध्य प्रदेश के संदर्भ में, सिंध नदी विदिशा जिले की सिरोंज तहसील से निकलती है और चंबल व यमुना के बेसिन का हिस्सा बनती है। यह भारत की बड़ी सिंधु (Indus) नदी से अलग है।
                                    • निष्कर्ष: मैकल की पुत्री होने के नाते नर्मदा को ही 'मैकलसुता' कहा जाता है। अतः सही उत्तर विकल्प (D) है
                                  • 27.करैरा अभयारण्य (Karera Sanctuary) किस जिले में स्थित है?

                                    (A) ग्वालियर
                                    (B) शिवपुरी
                                    (C) मुरैना
                                    (D) गुना


                                    सही उत्तर: (B) शिवपुरी

                                    व्याख्या:

                                    • करैरा अभयारण्य मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है।

                                    • यह अभयारण्य विशेष रूप से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (सोन चिड़िया) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध रहा है।

                                    • अन्य विकल्प:

                                      • ग्वालियर, मुरैना, गुना — इन जिलों में करैरा अभयारण्य स्थित नहीं है।

                                      • करेरा अभयारण्य (Karera Sanctuary) मध्य प्रदेश के (B) शिवपुरी (Shivpuri) जिले में स्थित था। 
                                        यहाँ सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या दी गई है:
                                        • (B) शिवपुरी (Shivpuri): करेरा अभयारण्य की स्थापना 1981 में शिवपुरी जिले में की गई थी। यह मुख्य रूप से सोन चिड़िया (Great Indian Bustard) के संरक्षण के लिए बनाया गया था।
                                          • महत्वपूर्ण जानकारी (2026 अपडेट): यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मध्य प्रदेश सरकार ने इस अभयारण्य को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित (De-notified) कर दिया है, यानी अब यह एक वन्यजीव अभयारण्य नहीं रहा है। ऐसा स्थानीय लोगों को भूमि अधिकारों की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए किया गया है।
                                        • (A) ग्वालियर (Gwalior): ग्वालियर में घाटीगांव (Ghatigaon) अभयारण्य स्थित है। करेरा की तरह यह भी सोन चिड़िया के संरक्षण के लिए ही बनाया गया था।
                                        • (C) मुरैना (Morena): मुरैना जिले में प्रसिद्ध राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (National Chambal Sanctuary) स्थित है, जो घड़ियालों, मगरमच्छों और ताजे पानी की डॉल्फिन के संरक्षण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
                                        • (D) गुना (Guna): गुना जिले में वर्तमान में कोई बड़ा राष्ट्रीय स्तर का वन्यजीव अभयारण्य नहीं है, हालांकि यह जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। 
                                        • निष्कर्ष: करेरा अभयारण्य का संबंध शिवपुरी जिले से है। अतः सही उत्तर विकल्प (B) है। 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह याद रखना जरूरी है कि इसे अब अभयारण्यों की सूची से हटा दिया गया है।
                                        • 28.मध्य प्रदेश भारत के केंद्र में स्थित है, इसलिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

                                          (A) वार्षिक तापमान का अंतर अधिक रहता है।
                                          (B) समुद्री प्रभाव नहीं पड़ता।
                                          (C) पश्चिमी तटीय क्षेत्रों की तुलना में वर्षा कम होती है।
                                          (D) मानसून का कोई प्रभाव नहीं होता।


                                          सही उत्तर (गलत कथन): (D) मानसून का कोई प्रभाव नहीं होता।

                                          व्याख्या:

                                          • (A) सही — मध्य प्रदेश में महाद्वीपीय जलवायु होती है, इसलिए गर्मी-सर्दी का अंतर अधिक रहता है।

                                          • (B) सही — समुद्र से दूर होने के कारण समुद्री प्रभाव नगण्य होता है।

                                          • (C) सही — पश्चिमी तट (कोंकण/मालाबार) की तुलना में MP में वर्षा कम होती है।

                                          • (D) गलत — मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है और अधिकांश वर्षा मानसून से ही होती है।

                                          •  भारत के केंद्र में स्थित है, इसलिए यहाँ की जलवायु पर समुद्री प्रभाव नहीं पड़ता है। इस संदर्भ में, गलत कथन है:
                                            (B) समुद्री प्रभाव कम नहीं होता है (Marine effect does not wear off)।
                                            यह कथन गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश समुद्र तट से बहुत दूर स्थित है, इसलिए यहाँ समुद्री प्रभाव (Marine effect) बिल्कुल नहीं होता या नगण्य होता है।
                                            सभी विकल्पों की विस्तृत व्याख्या:
                                            • (A) वार्षिक तापमान अंतर अधिक रहता है (Yearly temperature difference remain more): यह सही कथन है। समुद्र से दूरी के कारण यहाँ गर्मियों में बहुत अधिक गर्मी और सर्दियों में बहुत अधिक ठंड पड़ती है, जिससे दिन और रात/गर्मी और सर्दी के तापमान में काफी अंतर होता है (महाद्वीपीय जलवायु)।
                                            • (B) समुद्री प्रभाव कम नहीं होता है (Marine effect does not wear off): यह गलत कथन है। भारत के केंद्र में होने के कारण समुद्री प्रभाव पूरी तरह से समाप्त (wear off) हो जाता है। समुद्री प्रभाव तापमान को संतुलित रखता है, जो मध्य प्रदेश में नहीं होता है।
                                            • (C) पश्चिमी तटीय क्षेत्रों की तुलना में कम वर्षा होती है (There is less rainfall than western coastal areas): यह सही कथन है। पश्चिमी तट (जैसे केरल, कोंकण तट) पर दक्षिण-पश्चिम मानसून से सबसे पहले और सर्वाधिक वर्षा होती है। मध्य प्रदेश में तटीय क्षेत्रों की तुलना में औसतन कम वर्षा होती है।
                                            • (D) मानसून का कोई प्रभाव नहीं होता है (There is no effect of monsoon): यह कथन गलत है। मध्य प्रदेश की जलवायु पूरी तरह से मानसूनी है। राज्य में अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही होती है।
                                            • निष्कर्ष: चूँकि मध्य प्रदेश भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्य है, इसलिए यहाँ समुद्री प्रभाव नहीं होता। विकल्प (B) कहता है कि प्रभाव कम नहीं होता, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है 
                                            • 29.छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट क्षेत्र में मुख्य रूप से कौन-सी जनजाति पाई जाती है?

                                              (A) गोंड
                                              (B) कोरकू
                                              (C) भरिया
                                              (D) बैगा


                                              सही उत्तर: (C) भरिया (Bharia)

                                              व्याख्या:

                                              • पातालकोट (छिंदवाड़ा जिला) एक दुर्गम घाटी क्षेत्र है।

                                              • यहाँ भरिया जनजाति मुख्य रूप से निवास करती है।

                                              • अन्य जनजातियाँ:

                                                • गोंड — मध्य प्रदेश में व्यापक रूप से फैली हुई

                                                • कोरकू — मुख्यतः सतपुड़ा क्षेत्र (खण्डवा–बैतूल)

                                                • बैगा — मंडला, बालाघाट क्षेत्र

                                                • मध्य प्रदेश की किन जनजातियों को भारत सरकार द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति समूह (PVTG) में रखा गया है?

                                                  (A) गोंड, सहरिया, भील
                                                  (B) बैगा, भरिया और सहरिया ✅
                                                  (C) बैगा, कोरकू, भील
                                                  (D) गोंड, भील, पारधी

                                                • 30











    No comments:

    Post a Comment

    SET A

      1. उपमान प्रमाण आधारित है — CGPSC SET 2016 (A) प्रत्यक्ष पर        (B) तुलना पर (C) अनुमान पर     (D) शब्द पर ...